ई-साइकिल और लो-पावर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए CMVR में बदलाव का ड्राफ्ट प्रस्तावित है। 0.6 kW से कम पावर और 25 kmph से कम स्पीड वाले मॉडल को मोटर वाहन श्रेणी से बाहर रखने का प्रस्ताव है।
नई दिल्ली: भारत में ई-साइकिल और कम पावर वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी है। सरकार ने Central Motor Vehicles Rules (CMVR) में संशोधन का ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। प्रस्ताव के तहत कुछ खास तकनीकी मानकों को पूरा करने वाले लो-पावर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को मोटर वाहन की श्रेणी से बाहर रखने का प्रावधान किया जा सकता है।
इस प्रस्ताव का सीधा असर ई-साइकिल निर्माताओं, उपयोगकर्ताओं और लो-पावर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है।
25 किमी/घंटा से कम स्पीड वाले ई-साइकिल को राहत का प्रस्ताव
ड्राफ्ट के अनुसार, ऐसे इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जिनमें इलेक्ट्रिक मोटर की 30-मिनट पावर 0.6 kW से कम हो और उनकी अधिकतम डिजाइन स्पीड 25 किमी/घंटा से कम हो, उन्हें मोटर वाहन की श्रेणी से बाहर रखने का प्रस्ताव है।
इसका मतलब यह है कि निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करने वाले वाहनों पर मोटर वाहन से जुड़े कुछ नियम लागू नहीं होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम स्थिति सरकार द्वारा ड्राफ्ट पर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पैडल-असिस्ट ई-साइकिल के लिए भी प्रस्तावित नियम
प्रस्तावित नियमों में पैडल-असिस्ट ई-साइकिल के लिए मोटर कट-ऑफ से संबंधित शर्तें भी रखी गई हैं।
इसके तहत:
- ई-साइकिल की स्पीड 25 किमी/घंटा तक पहुंचने पर मोटर का आउटपुट कम होकर कट-ऑफ होना चाहिए।
- साइकिल चालक के पैडल चलाना बंद करने पर भी मोटर का आउटपुट कट-ऑफ होना जरूरी होगा।
- इलेक्ट्रिक मोटर की निर्धारित पावर सीमा का पालन करना होगा।
- वाहन की अधिकतम डिजाइन स्पीड निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए।
इन प्रावधानों का उद्देश्य पैडल-असिस्ट ई-साइकिल और अधिक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के बीच स्पष्ट तकनीकी अंतर तय करना है।
ई-साइकिल में ब्रेक और रिफ्लेक्टर भी जरूरी
प्रस्ताव में केवल मोटर की पावर और स्पीड ही नहीं, बल्कि सुरक्षा उपकरणों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
ऐसी ई-साइकिलों में उपयुक्त ब्रेक होने चाहिए। इसके अलावा वाहन के आगे सफेद और पीछे लाल रेट्रो-रिफ्लेक्टिव डिवाइस लगाए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है।
इससे रात या कम रोशनी की स्थिति में सड़क पर ई-साइकिल की दृश्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
1 अक्टूबर 2026 से लागू करने का प्रस्ताव
सरकार के ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू करने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, फिलहाल यह अंतिम नियम नहीं है।
ड्राफ्ट पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। निर्धारित अवधि के दौरान प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम नियमों को लेकर निर्णय ले सकती है।
इसलिए ई-साइकिल खरीदने वाले ग्राहकों और निर्माताओं के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि वर्तमान में बताए गए प्रावधान प्रस्तावित नियम हैं और अंतिम अधिसूचना में बदलाव संभव है।
किस पर पड़ेगा असर?
प्रस्तावित संशोधन का प्रभाव मुख्य रूप से इन वर्गों पर पड़ सकता है:
ई-साइकिल निर्माता: कंपनियों को अपने मॉडल की मोटर पावर, अधिकतम स्पीड और कट-ऑफ सिस्टम को प्रस्तावित मानकों के अनुरूप रखना पड़ सकता है।
ई-साइकिल यूजर्स: निर्धारित मानकों को पूरा करने वाली लो-पावर ई-साइकिलों को मोटर वाहन श्रेणी से बाहर रखने की स्थिति में उपयोगकर्ताओं को मोटर वाहन संबंधी कुछ अनुपालनों से राहत मिल सकती है।
ईवी कारोबार: लो-पावर इलेक्ट्रिक दोपहिया और ई-साइकिल से जुड़े निर्माता, विक्रेता और अन्य कारोबारों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
ई-साइकिल बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के साथ कम स्पीड और कम पावर वाले इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। ई-साइकिल पारंपरिक साइकिल और इलेक्ट्रिक दोपहिया के बीच एक अलग श्रेणी के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं।
ऐसे में तकनीकी मानकों के आधार पर यह स्पष्ट करना कि कौन-सा वाहन मोटर वाहन की श्रेणी में आएगा और कौन-सा नहीं, निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, अंतिम नियम लागू होने तक इसे सरकारी प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
