NITK सुरथकल को उन्नत इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन मोटर विकसित करने के लिए ₹10.3 करोड़ मिले हैं। इससे भारत इलेक्ट्रिक वाहनों में आत्मनिर्भर बनेगा। इस परियोजना में आईआईटी मद्रास, आईआईटी हैदराबाद और सीडैक तिरुवनंतपुरम भी शामिल हैं। यह पहल सतत गतिशीलता को बढ़ावा देगी और लागत कम करेगी। भारत इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में एक वैश्विक खिलाड़ी बन जाएगा।
भारत सरकार के महत्वाकांक्षी "मिशन फॉर एडवांसमेंट्स इन हाई इम्पैक्ट एरियाज़ ( (MAHA) - इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मिशन" के तहत, NITK सुरथकल स्थित सेंटर फॉर सिस्टम्स डिज़ाइन (CDS) को ₹10.3 करोड़ का अनुदान मिला है। यह अनुदान दुर्लभ मृदा तत्वों (rare earth-free) से मुक्त उन्नत इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन मोटर (जैसे Switched Reluctance Motor and Synchronous Reluctance Motor) विकसित करने के लिए प्रदान किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में सतत गतिशीलता को बढ़ावा देना है।
"‘Rare Earth Magnet Free Axial Flux Synchronous, Radial Flux Switched Reluctance Motor and their Controllers for EV Applications', शीर्षक वाली यह परियोजना, भारत को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।ANRF ने महा कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहन गतिशीलता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में चुना है।
NITK इस महत्वपूर्ण परियोजना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तीन प्रमुख संस्थान - आईआईटी-मद्रास, आईआईटी-हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम स्थित उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र - भी भागीदार होंगे। एनआईटीके को इस कार्यक्रम के लिए सात इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नोड्स (E-Nodes) में से एक के रूप में चुना गया है। इन सात नोड्स में से, दो टीमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ट्रॉपिकलाइज्ड बैटरी और सेल तकनीक (टीवी-I) पर काम करेंगी, तीन टीमें पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्राइव्स (टीवी-II) का नेतृत्व करेंगी, और दो टीमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (टीवी-III) पर ध्यान केंद्रित करेंगी।
इस परियोजना के (lead principal investigator) NITK के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर होंगे। इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर बी. वेंकटेश पेरुमल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जयराज पी. भी प्रमुख अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगे। मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एमएएचई, मणिपाल के वैमानिकी एवं ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर संदेश भक्त बी. सह-प्रमुख अन्वेषक होंगे।
इस धनराशि से भारत को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में एक वैश्विक खिलाड़ी बनने में मदद मिलेगी। दुर्लभ मृदा तत्वों पर निर्भरता कम करने से लागत कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) मजबूत होगी। यह उपाय न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी है। इन स्वदेशी (indigenous) इंजनों के विकास से भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा।
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